पंचम परिकल्पना सम्मान समारोह

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पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन का व्यापक दृश्य

ब्लॉगरों को रचनात्मक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से विगत पांच वर्षों से कार्यरत लखनऊ की प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था परिकल्पना द्वारा विगत दिनों आयोजित पांच दिवसीय पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन एवं परिकल्पना सम्मान समारोह श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो तथा सांस्कृतिक राजधानी कैंडी में पूरी भव्यता के साथ संम्पन हुआ| समारोह का उद्घाटन श्रीलंका के वरिष्ठ रंगकर्मी डान सोमरत्ने विथाना ने किया। मुख्य अतिथि रहे उ.प्र.शासन के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे| और मानद अतिथि रहे निदेशक भारतीय डाक सेवा राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र (जोधपुर) के कृष्ण कुमार यादव तथा विशिष्ट अतिथि रहे उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी। इस सम्मलेन में मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, असम, दिल्ली, हरियाणा समेत उत्तर प्रदेश के कई ब्लॉगरों को सम्मानित किया गया। दिल्ली, लखनऊ, काठमाण्डू(नेपाल) तथा थिम्पू (भूटान) के बाद पांचवा अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन दिनांक 23 मई 2015 से 27 मई 2015 तक श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो, सांस्कृतिक राजधानी कैंडी एवं निगम्बो आदि नगरों में संम्पन हुआ|इस अवसर पर ब्लॉगरों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र देकर एक निश्चित राशि के साथ सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से डॉ राम बहादुर मिश्र और सुनीता प्रेम यादव ने किया। अंत में कार्यक्रम के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया|[१] [२]

उद्देश्य[सम्पादन]

संबोधित करते रवीन्द्र प्रभात

संस्कृतिक दृष्टि से भारत और श्रीलंका में कई समानताएं हैं | भारत से निकलकर बौद्ध धर्म जहाँ श्रीलंकाई संस्कृति में विलीन हो गया वही भारतीय नृत्य शैलियों का यहाँ व्यापक प्रसार हुआ | श्रीलंका के शास्त्रीय संगीत चीनी, जापानी, भारतीय और इंडोनेशिया के संगीत के अधिक समीप हैं | यहाँ अनेकानेक नृत्य शैलियाँ प्रचलित है जो नाटक से जुडी हुई है | इसमें रामायण का महत्वपूर्ण स्थान है | श्रीलंका का भारतीय दर्शन, धर्म, अध्यात्म में विशेष महत्व है | रामकथा के पौराणिक आख्यान श्रीलंका के बिना अधूरे हैं | भगवान राम श्रीलंका में जाकर आसुरी शक्तियों का विनाश करते हैं | रामचरित मानस जो की साहित्य में अप्रितम ग्रन्थ हैं उसके सात में से तीन कांडो में श्रीलंका का विशेष वर्णन है | यही कारण है की हिंदू जनमानस में श्रीलंका के प्रति विशेष आकर्षण है | इस आयोजन को श्रीलंका में आयोजित करने के पीछे मूल उद्देश्य यही है।

पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, कोलंबो का उदघाटन करते सोमरत्न विथाना

उदघाटन सत्र[सम्पादन]

...ब्लॉग में समाज को बदलने की बड़ी ताक़त है, इसलिए आप सभी मिलकर ब्लॉग के माध्यम से हाशिये के समाज को मुख्यधारा में लाने हेतु आगे बढ़ें।

-नकुल दुबे

सम्मेलन के मुख्य अतिथि उ.प्र. शासन के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे ने इस अवसर पर ब्लॉगरों को संवोधित करते हुए कहा कि निश्चित रूप से परिकल्पना संस्था दुनिया की बेहतरी की दिशा में कार्य कर रही है। मुझे गर्व है कि यह मेरे शहर लखनऊ की संस्था है। आप सभी ब्लॉगरों से ये उम्मीद की जाती है आप दुनिया की बेहतरी के लिए परिकल्पना संस्था के साथ मिलकर काम करेंगे, साथ ही एक सुंदर और खुशहाल सह-अस्तित्व की परिकल्पना को साकार करेंगे। श्री दुबे ने आगे कहा कि ब्लॉग में समाज को बदलने की बड़ी ताक़त है, इसलिए आप सभी मिलकर ब्लॉग के माध्यम से हाशिये के समाज को मुख्यधारा में लाने हेतु आगे बढ़ें। इस अवसर पर श्री लंका के वरिष्ठ नाट्यकर्मी डान सोमरत्ने विथाना ने कहा कि पूरी दुनिया ने ब्लॉग की ताक़त को महसूस किया है।

...पूरी दुनिया ने ब्लॉग की ताक़त को महसूस किया है। यह माध्यम समाज में नयी क्रांति लाने में समर्थ है।

-डान सोमरत्ने विथाना

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के क्रम में सम्मान समारोह, आलेख वाचन, चर्चा-परिचर्चा में देश के कई राज्यों एवं श्रीलंका के ब्लॉगरों तथा साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया | उल्लेखनीय है कि ब्लॉग, साहित्य, संस्कृति और भाषा के लिए प्रतिबद्ध परिकल्पना विगत चार वर्षों से ब्लॉग लेखन को बढ़ावा दे रही है| इस आयोजन में आजोजित संगोष्ठी के तीन महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुए जिनका मुख्य फोकस ब्लॉग के माध्यम से दक्षिण एशिया में शान्ति सद्भावना की तालाश तथा दक्षिण एशिया में भाषाई सद्भावना एवं उत्पन्न समस्याएं तथा साहित्यिक संस्कृतिक आदान-प्रदान करना रहा| उदघाटन सत्र की अध्यक्षता रवीन्द्र प्रभात तथा संचालन संयुक्त रूप से डॉ राम बहादुर मिश्रा और सुनीता प्रेम यादव ने किया।

परिचर्चा सत्र[सम्पादन]

पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, कोलंबो का दीप प्रज्वलन करके शुभारंभ करते अतिथिगण
"ब्लॉग की लोकप्रियता इसी बात से सिद्ध होती है कि हर कोई ब्लॉग पर आना चाहता है।”
कृष्ण कुमार यादव

सम्मान समारोह एवं परिचर्चा सत्र का आयोजन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो के कोणकोर्ड ग्राउंड सभागार में संम्पन हुआ | सम्मान समारोह के बाद परिचर्चा के दो सत्र आयोजित हुए | प्रथम सत्र की परिचर्चा का विषय था ‘सृजनात्मक साहित्य में हिंदी ब्लॉग का योगदान’ इस सत्र की अध्यक्षता कबीर कम्युनिकेशन की क्रिएटिव हेड डॉ. सर्जना शर्मा (दिल्ली) ने की तथा सञ्चालन लखनऊ के डॉ. रामबहादुर मिश्र ने किया |

पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, कोलंबो के मुख्य सत्र को संबोधित करते नकुल दुबे

मुख्य वक्ता प्रकाश हिन्दुस्तानी ने अपने वक्तव्य में कहा कि ब्लॉगिंग के प्रारंभ में कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने टिप्पणी की थी कि इसके माध्यम से साहित्य का भला नहीं होगा | यही बात फिल्मो के सन्दर्भ में भी कही गयी थी लेकिन आज हम देखते हैं की फ़िल्म और ब्लॉगिंग दोनों के माध्यम से हिंदी को प्रतिष्ठा मिली है | ब्लॉगिंग के माध्यम से अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास हुआ है | एक बात अवश्य है कि बहुत से ब्लॉगरों के कारण ब्लॉग पर स्तरहीनता का आरोप लगा है | ए. बी. पी. न्यूज मुंबई के वरिष्ठ संपादक जीतेन्द्र दीक्षित ने अपने महत्वपूर्ण शोध के माध्यम से विभीन्न आकडें प्रस्तुत करते हुए कहा की भारत में ५० हजार से अधिक ब्लॉग हैं | ११ करोड लोग फेसबुक से जुड़े है |

"ब्लॉगिंग वुद्धिजीवियों का एक प्रमुख आहार है, क्योंकि ब्लॉगिंग ने हमारे हाथ में ऐसा हथियार दिया है जिससे हम दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते पहुँच सकते हैं।”
रवीन्द्र प्रभात

परिचर्चा में अपने उद्वोधन के क्रम में उत्तर महारास्ट्र विश्व विद्यालय जलगांव के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुलकर्णी ने ब्लॉगिंग को एक शक्तिशाली माध्यम बताते हुए कहा ब्लॉग अभिव्यक्ति का ताकतवर माध्यम बनकर उभरा है | आतंकवादी भी इससे भयभीत हैं यही कारण है कि बंगलादेश में अभिजीत राम और वशिकुर्ररहमान जैसे ब्लॉगरों की हत्या आतंकवादी करते है |

रेवान्त के कवि नरेश सक्सेना पर एकाग्र अंक का लोकार्पण
सांस्कृतिक कार्यक्रम का एक दृश्य

वरिष्ठ ब्लॉगर तथा निदेशक भारतीय डाक सेवा राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र (जोधपुर) के कृष्ण कुमार यादव ने कहा की ब्लॉग की लोकप्रियता इसी बात से सिद्ध होती है कि हर कोई ब्लॉग पर आना चाहता है | स्थापित साहित्यकार खतरा महसूस कर रहे है तथा ब्लॉगिंग की शक्ति को स्वीकार करके इसे अपना रहे हैं | ब्लॉगिंग के नकरात्मक पहलू पर प्रकाश डालते हुए श्री यादव ने कहा कि वर्तनी का दोष, कट पेस्ट और भड़ास इसके नकारात्मक पक्ष है | अपने अध्यक्षीय व्यक्तव्य में दिल्ली की सर्जना शर्मा कहा कि ब्लॉगिंग लेखन के लिए कार्यशालाओ की आवशयकता है क्योकि इसके आभाव में संस्कार विहीन साहित्य आ रहा है |

प्रमुख वक्तव्य

दूसरा महत्वपूर्ण सत्र था “ हिंदी ब्लॉग्गिंग की समृद्धि में महिलाओं का योगदान “ जिसकी अध्यक्षता डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने की | विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध ब्लॉगर आकांक्षा यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग के क्षेत्र में एक चौथाई महिलायें सक्रिय हैं | इनमे प्रायः पुरुष समाज की मानसिकता के विरुद्ध महिलाएँ लिख रही हैं | दहेज, घरेलु हिंसा, भ्रूण हत्या, देह विमर्श जेसे विषयों पर वे वेबाकी से लिख रही हैं | लखनऊ से प्रकाशित रेवांत पत्रिका की संपादक डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएँ ब्लॉगिंग के क्षेत्र में दबंगई के साथ लिख रही है और वे पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ रही हैं | सुनीता प्रेम यादव (औरंगाबाद) ने अपने वक्तव्य में कहा कि १६ करोड़ ब्लॉगरों में २५ % महिलाएँ बड़ी सक्रियता से साथ लिख रही हैं | सुनीता कि चिंता यह थी कि मूल्य आधारित लेखन के आभाव में ब्लॉगिंग सड़क छाप साहित्य बनकर रह जायेगा |

रायपुर (छतीसगढ़) से आयी डॉ. उर्मिला शुक्ल ने ब्लॉगिंग कि विसंगतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हम हजारों मिल दूर बैठे मित्रों से तो बात कर लेते है किन्तु अपने घर बैठे सदस्यों से संवाद नहीं स्थापित कर पाते |

डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि महिलाएँ हर विधा में लिख रही हैं | ब्लॉग कि श्रेणियाँ भी विवध हैं एकल ब्लॉग, समूह ब्लॉग आदि | सन्दर्भ विषय भी विविध हैं राजनितिक, सामाजिक, साहित्यिक आदि |

एक शाम कुसुम वर्मा के नाम
अल्पना की आर्ट गैलरी

एक शाम कुसुम वर्मा के नाम[सम्पादन]

तीसरा सत्र संगीत से संबंधित था जो ‘एक शाम कुसुम शर्मा के नाम’ रहा | अवधी लोकगायिका कुसुम वर्मा ने अपने अवधी लोकगीतों के माध्यम से समा बाँध दिया | कुसुम वर्मा के साथ श्रीलंका के वादको ने संगत दी | इस सत्र में श्रीलंका के लगभग आधे दर्जन प्रतिभागियों ने भी प्रतिभाग कि, जिसमें प्रमुख थी सुश्री सजिनी हंसिका विजेसेकरा, लियाङ्गे हिमालिका परेरा, हंसी एराण्डी, ड्यूमिनी समरकोन आदि।

कला प्रदर्शनी[सम्पादन]

इस अवसर पर दिनांक 23 मई 2015 से 25 मई 2015 तक रायपुर (छतीसगढ़) की डॉ अल्पना देशपांडे और सुश्री अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की कैंडी और कोलंबो में लगी प्रदर्शनी भी सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रहा। डॉ अल्पना हिंदी चिट्ठाजगत में एक ऐसी चित्रकार हैं जिन्हें लिमका बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकोर्ड में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वर्तमान में वे डॉ. खूबचंद बघेल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भिलाई में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।[३][४]

अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन[सम्पादन]

इसके अलावा 23 मई को श्री लंका की सांस्कृतिक राजधानी कैंडी में अंतर्राष्ट्रीय कविता सम्मेलन सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. शुभदा पाण्डेय ने की | कार्यक्रम में कुसुम वर्मा, डॉ अनीता श्रीवास्तव, ओम प्रकाश जयंत, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, अंतर सोहील, डॉ.राम बहादुर मिश्र, डॉ. उर्मिला शुक्ल, डॉ. सुनील कुलकर्णी तथा रवीन्द्र प्रभात की कविताओं को श्रोताओं ने सराहा| इसमें देश-विदेश के प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जनचेतना का भाव जाग्रत किया। कहते हैं कि कवि सम्मेलन का इतिहास बहुत पुराना है। इसलिए कवि-सम्मेलनों के आरम्भ की तिथि ज्ञात करना सम्भव नहीं है। परन्तु १९२० में पहला वृहद कवि सम्मेलन हुआ था जिसमें कई कवि और श्रोता था। उसके बाद कवि सम्मेलन भारतीय संस्कृति का अभिन्न भाग बन गया। आज भारत ही नहीं, वरन पूरे विश्व में कवि सम्मेलनों का आयोजन बड़े पैमाने पर होता है। इस अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का सञ्चालन डॉ. रामबहादुर मिश्र ने किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम[सम्पादन]

दिनांक 24 मई 2015 को शाम 4.30 बजे से श्री लंका के कलाकारों के द्वारा "ओक-रे कंदयन डांस" प्रस्तुत किया गया। श्री लंका की परंपरागत नृत्य शैली का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करते हुये श्री लंका के कलाकारों द्वारा "हाक गेड़ीय", "मुगल बेरा", "पूजा नाटुमा", "देवील्ड ड्रम", "मयूरा नृत्य", "राइबन आइटम्स","पनथेरु नाटुमा", "सलुपालिया", "गिनी सीसीला", "कुलु नातूमा", "उदराता वेस नातूमा", "दी ड्रम ऑर्केस्ट्रा" एयर "फायर वाकिंग" आदि की मनमोहक प्रस्तुति की गयी।

लोकार्पण[सम्पादन]

इस अवसर पर लखनऊ से प्रकाशित रेवान्त पत्रिका के कवि नरेश सक्सेना पर एकाग्र अंक का लोकार्पण उत्तर प्रदेश के पूर्व नगर विकास मंत्री नकुल दुबे, श्री लंका के वरिष्ठ नाट्यकर्मी डॉन सोमरथ्ने विथना, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक, भारतीय डाक सेवा कृष्ण कुमार यादव, उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय जलगांव के हिन्दी विभागाद्घ्यक्ष सुनील कुलकर्णी और परिकल्पना समय के प्रधान संपादक रवीन्द्र प्रभात के कर कमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर पत्रिका की संपादक डॉ अनीता श्रीवास्तव भी उपस्थित रहीं।

प्राप्त सम्मान का विवरण[सम्पादन]

सम्मानित विभूतियाँ[सम्पादन]

समाचार कतरन[सम्पादन]

इन्हें भी देखें[सम्पादन]

परिकल्पना सम्मान-2010परिकल्पना सम्मान-2011परिकल्पना सम्मान-2012परिकल्पना सम्मान-2013परिकल्पना सम्मान-2014परिकल्पना सम्मान-2015परिकल्पना विशेष सम्मानपरिकल्पना सार्क शिखर सम्मान-2014परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान-2015प्रथम परिकल्पना सम्मान समारोह• द्वितीय परिकल्पना सम्मान समारोहतृतीय परिकल्पना सम्मान समारोहचतुर्थ परिकल्पना सम्मान समारोहषष्टम परिकल्पना सम्मान समारोहसप्तम परिकल्पना सम्मान समारोह

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. श्रीलंका में पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन संपन्न
  2. ब्लॉगर आकांक्षा यादव का श्रीलंका में सम्मान
  3. अल्पना एवं अदिति का भूटान में सम्मान
  4. श्रीलंका में सम्मानित हुर्इं अल्पना एवं आदिती